Summary: उत्तर के एक छोटे से गाँव की पुरानी हवेली में गायब हुआ युवक आकाश, जहाँ से उसने कभी वापस लौट कर नहीं आया। यह कहानी एक रहस्यमयी काले जादू और अनसुलझे राज़ की है, जो गाँव की मिट्टी और हवेली के “अंधे कमरे” से जुड़ा है।
गाँव में फैला अनोखा अंधेरा
उत्तर के इस छोटे से गाँव में ऐसा अंधेरा था जो सूरज की रोशनी में भी नहीं घुलता, और चाँदनी की चादर भी उसे ढक नहीं पाती थी। गाँव की मिट्टी में एक अजीब सी गहराई थी, जो रातों को और भी गहरी बना देती थी।
पुरानी हवेली और उसका रहस्य
गाँव की पुरानी हवेली के चारों ओर घने पेड़ खड़े थे, जैसे छुपे हुए रक्षक। हवेली की टूटी-फूटी दीवारें समय की मार झेल रही थीं। खासकर हवेली के “अंधे कमरे” से बाहर एक अजीब रोशनी का साया रात को दिखाई देता था।
युवक आकाश की कहानी
शहर से आया आकाश गाँव में पुरानी किताबें तलाशने आया था। उसने हवेली के अंदर जाने की हिम्मत दिखाई, पर वहां की फुसफुसाहट, पुरानी पांडुलिपियाँ और काले जादू से जुड़ी पंक्तियाँ उसे डराती थीं।
रात की घटना और गायब होना
एक रात जब आकाश ने “अंधे कमरे” में प्रवेश किया, दरवाज़ा चरमराया और सन्नाटा छा गया। उस कमरे में एक खून से सनी डायरी और एक जादुई किताब मिली। अगले दिन आकाश गायब था, और उसके बारे में कोई खबर न मिली।
वृत्तचित्र के संकेत और रहस्यमयी पंथ
काला जादू और रहस्यमयी पंथ की कथा गाँव के बुजुर्गों ने साझा की, जो मनोवैज्ञानिक सीमाओं को पार कर अलौकिक शक्तियों का दुरुपयोग दर्शाती थी। आकाश की डायरी में लिखा था:
“साया लौट कर नहीं आएगा, पर वह हमेशा साँस लेता रहेगा।”
गाँव में बनी रहस्य और भय
आकाश के गायब होने के बाद भी गाँव में काले चिह्न, निशान और पेड़ों की छाइयाँ भय का माहौल बनाती हैं। यह सवाल बना रहता है कि क्या आकाश उस साये का हिस्सा बन गया जो कभी लौट कर नहीं आया?
अंतिम विचार
यह कहानी काला जादू और पुरानी मान्यताओं के बीच उलझे हुए रहस्यों को दर्शाती है। इस अनसुलझी पहेली का हल कभी मिला या नहीं, पता नहीं, मगर उस गाँव में आज भी वह अंधेरा सोता नहीं।
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